मंगलवार 17 मार्च 2026 - 19:12
रमज़ान युद्द मे 220 से अधिक बच्चो की शहादत मानवाधिकार का खुला उल्लंघन है

जनसंख्या युवा केंद्र, परिवार स्वास्थ्य और विद्यालय स्वास्थ्य, इलाज और चिकित्सा शिक्षा मंत्रालय ने एक बयान मे रमज़ान युद्ध मे 220 बच्चो की शहादत की निंदा करते हुए कहा कि यह क़दम मानवाधिकारो का खुला उल्लंघन है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, जनसंख्या युवा केंद्र, परिवार स्वास्थ्य और विद्यालय स्वास्थ्य, इलाज और चिकित्सा शिक्षा मंत्रालय ने एक बयान मे रमज़ान युद्ध मे 220 बच्चो की शहादत की निंदा करते हुए कहा कि यह क़दम मानवाधिकारो का खुला उल्लंघन है।

जनसंख्या युवा केंद्र, परिवार स्वास्थ्य और विद्यालय स्वास्थ्य, इलाज और चिकित्सा शिक्षा मंत्रालय के बयान मे आया कि गहरे दुख के साथ रमज़ान युद्ध मे 220 से अधिक बच्चो विशेष रूप से ज़ायोनी दुशमन के जुनून भरे कर्रवाई से जोकि मीनाब मदरसे के 168 बच्चो की शहादत पर संवेदना व्यक्त करते हुए इस क्रूर कार्रवाई की निंदा करते है।

 इस बयान मे आया है कि इस मानवाधिकार विरोधी कार्रवाई मे वह बच्चे जिनका अधिकार खुशी, अपने सपनो की दुनिया बनाना था उनकी शहादत अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार का खुला उल्लंघन है।

बयान मे आगे कहा गया है कि अंतर्राष्ट्रीय क़ानून और बाल अधिकार कंन्वेंशन (धारा 38 और 39) मे युद्ध मे बच्चो को निशाना बनाना युद्ध अपराध हिसाब होता है जिनेवा कंवेंशन (1977 के अतिरिक्त प्रोटोकॉल, अनुच्छेद 4 और 48) के अनुसार बच्चो पर हर प्रकार का हमला युद्ध अपराधा है। और यूनिसेफ की घोषणा के अनुसार, बच्चे बलिदान करने योग्य नही है। युद्ध मे बच्चो का हर प्रकार का नरसंहार मानवाधिकार का खुला उल्लंघन है। इनसबके बा वजूद मीनाब स्कूल के 168 बच्चे ना तो अर्ध सैनिक थे और नही राजनेता और ना सैनिक, मानवाधिकार का ध्वज बुलंद करने वालो के बमो ने इन बच्चो को निशाना बनाया। 168 बच्चो जो अपनी कक्षाओ मे पढ़ रहे थे, इंसान दिखने वाले शैतानो की मीसाइलो द्वारा उनके जीवन का दीपक हमेशा के लिए बुझ गया। इतिहास का यह काला पन्ना कभी भुलाया नही जा सकता।

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